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हरिशंकर परसाई के उद्धरण

बिना स्त्री की छाप के कोई चीज़ अच्छी या लोकप्रिय नहीं। विज्ञापनबाजों ने जिस तरह नारी का उपयोग किया है, उसी तरह हमारे कुछ कवि कर रहे हैं। नारी छाप साबुन और नारी छाप कविता—एक ही टाइप है।