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आचार्य रामचंद्र शुक्ल के उद्धरण

भारी मूर्ख को लोग जो 'गदहा' कहते हैं, वह इसीलिए कि 'मूर्ख' कहने से उनका जी नहीं भरता—उनके हृदय में उपहास अथवा तिरस्कार का जो भाव रहता है, उसकी व्यंजना नहीं होती।