Font by Mehr Nastaliq Web

कृष्ण बिहारी मिश्र के उद्धरण

भारतीय विद्या के शिखर-प्रतीकों को तोड़े बिना, विद्या के सनातन संस्कारों और जातीय अभीप्सा के मूर्त चिह्नों को मिटाये बिना, अविद्या-औद्धत्य को प्रतिष्ठित करना कदाचित् संभव नहीं है।