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महादेवी वर्मा के उद्धरण

भारतीय पुरुष जीवन में नारी का जितना ऋणी है, उतना कृतज्ञ नहीं हो सका। अन्य क्षेत्रों के समान साहित्य में भी उसको स्वभावगत संकीर्णता का परिचय मिलता रहा है।