Font by Mehr Nastaliq Web

वात्स्यायन के उद्धरण

बहुपत्नीक पुरुष को चाहिए कि वह एक पत्नी के साथ की गई रतिक्रीड़ा, अथवा शरीर के किसी विकार को अथवा उसके उलाहने (शिकायत) को विश्वास में आकर किसी दूसरी स्त्री से न कहे।