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कृष्ण बिहारी मिश्र के उद्धरण

अपनी असमर्थता से आदमी लजाए या दम्भ के मारे छाती उतान किए रहे, अपनी कमज़ोरी को लाख तिकड़म करके भी छिपा नहीं पाता।