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महादेवी वर्मा के उद्धरण

अपनी असीम विद्या-बुद्धि का भार लिए हुए एक स्त्री, किसी के गृह का अलंकार मात्र बनकर संतुष्ट हो सकेगी—ऐसी आशा दुराशा के अतिरिक्त और क्या हो सकती है।