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श्यामसुंदर दास के उद्धरण

अपनी आदिम अवस्था में मनुष्य की इच्छा-शक्ति के साथ लोकहित का संबंध चाहे न रहा हो, पर समाज की सभ्यता की वृद्धि होने पर तो उसकी इच्छाएँ लोक-मंगल की ओर अवश्य उन्मुख हुईं।