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स्वामी विवेकानन्द के उद्धरण

अपने जीवन के प्रत्येक क्षण को ही देखो : इसमें मानसिक घटनाएँ बाहर की भौतिक घटनाओं की तुलना में कितनी अधिक हैं। यह अंतर्जगत् प्रबल वेगशील है और इसका कार्यक्षेत्र भी कितना विस्तृत है—इंद्रिय-ग्राह्य व्यापार इसकी तुलना में बिल्कुल अल्प है।