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श्रीलाल शुक्ल के उद्धरण

अँग्रेज़ी का वाक्य-विन्यास, उसके शब्द और मुहावरे, उसके विशिष्ट अभिव्यक्ति-प्रयोग सभी हिंदी गद्य में उतरने लगे हैं जो हिंदी-पाठक को आतंकित करते हैं। और केवल हिंदी जाननेवाले लेखक को निरुत्साह बनाकर छोड़ देते हैं।