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वात्स्यायन के उद्धरण

अलौकिक और अदृष्टार्थ (परोक्ष) फल देने वाले, यज्ञ-यागादि में प्रवृत्त न होने वाले मनुष्यों का शास्त्र के आदेश से प्रवृत्त होना तथा लौकिक एवं दृष्टार्थ (प्रत्यक्ष) फल देने वाले मांस-भक्षण आदि में प्रवृत्त मनुष्यों का, शास्त्र के आदेश से ही निवृत्त होना 'धर्म' है।