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श्री श्रीठाकुर अनुकूलचन्द्र के उद्धरण

अहंकार आसक्ति लाता है; आसक्ति ला देत्ती है स्वार्थबुद्धि, स्वार्थबुद्धि लाती है काम, काम से ही क्रोध की उत्पत्ति होती है और क्रोध से ही आती है हिंसा।

अनुवाद : श्रीरामनंदन प्रसाद