Font by Mehr Nastaliq Web

श्रीमद् राजचंद्र के उद्धरण

आत्मा कर्म का कर्ता नहीं है, कर्म ही कर्म का कर्ता है अथवा कर्मबंध सहज स्वभाव है, अथवा कर्मबंध होना आत्मा का धर्म है।