Font by Mehr Nastaliq Web

श्याम मनोहर के उद्धरण

आलोचक को दार्शनिक होना पड़ता है। ऐसे दार्शनिक आलोचकों के न होने पर पाठक अनाथ हो जाता है, लेखक अनुशासनहीन हो जाते हैं।

अनुवाद : निशिकांत ठकार