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श्याम मनोहर के उद्धरण

आलोचना साहित्य के विषय के बारे में बोलती है; अंतर्वस्तु के बारे में नहीं, रूप के बारे में तो बिलकुल ही नहीं। समीक्षकों को चाहिए कि बुद्धि की बाजी लगाकर समीक्षा के प्रमेयों की खोज करें।

अनुवाद : निशिकांत ठकार