इमाम साहब
अज़ान का वक़्त तंग हो रहा था। आँतें कुल हो अल्लाह पढ़ रही थीं मगर खाने का दूर-दूर पता नहीं था। शकीलउद्दीन बेचैनी से टहल रहे थे। "लगता है, आज फिर भूखा रहना क़िस्मत में लिखा है", कहते हुए वह बाहर निकले।
"ए इमाम साहब! ज़रा ठहरो, खाना तुम्हारे लिए ही ला