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लियू सिक्सिन

1963 | बीजिंग

लियू सिक्सिन की संपूर्ण रचनाएँ

उद्धरण 1

हर दौर अपने लोगों को अदृश्य ज़ंजीरें पहना देता है, मैं अपने दौर की ज़ंजीरें पहनकर नाचने को अभिशप्त हूँ।

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