noImage

लालनाथ

जसनाथ संप्रदाय से संबद्ध। सच्ची आत्मानुभूति और मर्मबेधिनी वाणी के धनी संतकवि।

जसनाथ संप्रदाय से संबद्ध। सच्ची आत्मानुभूति और मर्मबेधिनी वाणी के धनी संतकवि।

लालनाथ की संपूर्ण रचनाएँ

दोहा 30

होफाँ ल्यो हरनांव की, अमी अमल का दौर।

साफी कर गुरुग्यान की, पियोज आठूँ प्होर॥

  • शेयर

क्यूँ पकड़ो हो डालियाँ, नहचै पकड़ो पेड़।

गउवाँ सेती निसतिरो, के तारैली भेड़॥

  • शेयर

टोपी धर्म दया, शील की सुरंगा चोला।

जत का जोग लंगोट, भजन का भसमी गोला॥

  • शेयर

खेलौ नौखंड माँय, ध्यान की तापो धूणी।

सोखौ सरब सुवाद, जोग की सिला अलूणी॥

  • शेयर

प्रेम कटारी तन बहै, ग्यान सेल का घाव।

सनमुख जूझैं सूरवाँ, से लोपैं दरियाव॥

  • शेयर

Recitation

जश्न-ए-रेख़्ता (2022) उर्दू भाषा का सबसे बड़ा उत्सव।

फ़्री पास यहाँ से प्राप्त कीजिए