15 फरवरी, 1955 को बिहार के छपरा (अब सीवान) के लहेजी गाँव में जन्मे हृषीकेश सुलभ की शुरूआती पढ़ाई-लिखाई गाँव में हुई। गाँव के ही उन्हें रंगमंच के संस्कार मिले। कथा-लेखन, नाट्य-लेखन, रंगकर्म के साथ-साथ हृषीकेश सुलभ की सांस्कृतिक आंदोलनों में सक्रिय भागीदारी रही है। इसके साथ-साथ वह तमाम पत्र-पत्रिकाओं में रंगमंच पर नियमित लेखन करते रहते हैं।
'अग्निलिक' उनका प्रथम उपन्यास है और 'दाता पीर' नवीनतम। 2019 में उन्हें संगीत नाटक अकादमी पुरस्कार से सम्मानित किया गया। उन्हें लघु कथाएँ लिखने और बिदेशिया शैली में नाटक लिखने के लिए भी जाना जाता है।