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चंद्रकला

1866 | बूंदी, राजस्थान

माधुर्य गुणयुक्त कविता में सलज्ज शृंगार की विवेचना करने वाली भारतेंदु युगीन अल्पज्ञात कवयित्री।

माधुर्य गुणयुक्त कविता में सलज्ज शृंगार की विवेचना करने वाली भारतेंदु युगीन अल्पज्ञात कवयित्री।

Recitation

aah ko chahiye ek umr asar hote tak SHAMSUR RAHMAN FARUQI