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वाराणसी के रचनाकार

कुल: 9

कबीर

1398 - 1518

मध्यकालीन भक्ति-साहित्य की निर्गुण धारा (ज्ञानाश्रयी शाखा) के अत्यंत महत्त्वपूर्ण और विद्रोही संत-कवि।

रैदास

1398 - 1518

भक्ति की ज्ञानमार्गी एवं प्रेममार्गी शाख़ाओं के मध्य सेतु। संत काव्यधारा के महत्त्वपूर्ण कवि।

समादृत आलोचक, भाषा विज्ञानी, संपादक और निबंधकार। ‘नागरी प्रचारिणी सभा’ और ‘हिंदी साहित्य सम्मेलन’ के संस्थापक।

आठवें दशक के प्रमुख कवि। साहित्य अकादेमी पुरस्कार से सम्मानित।

नई पीढ़ी के कवि। 'मोर्चे पर विदागीत' शीर्षक से एक कविता-संग्रह प्रकाशित। भारतभूषण अग्रवाल पुरस्कार से सम्मानित।

नई पीढ़ी की कवयित्री। शोध, गद्य-लेखन और अनुवाद-कार्य में भी सक्रिय।

प्राचीन शैली में लिखने वाले आधुनिक कवियों में से एक। अलंकार ग्रंथ 'भारती भूषण' कीर्ति का आधार ग्रंथ।

संस्कृत-हिंदी-अँग्रेज़ी के रचनाकार। बनारस हिंदू विश्वविद्यालय के दर्शन विभाग से संबद्ध रहे।

नई पीढ़ी के कवि। रंगमंच में बतौर अभिनेता भी सक्रिय।

हिन्दवी उत्सव 2026

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