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वाराणसी के रचनाकार

कुल: 12

भारतीय नवजागरण के अग्रदूत। समादृत कवि, निबंधकार, अनुवादक और नाटककार।

रैदास

1398 - 1518

भक्ति की ज्ञानमार्गी एवं प्रेममार्गी शाख़ाओं के मध्य सेतु। संत काव्यधारा के महत्त्वपूर्ण कवि।

रामभक्ति शाखा के महत्त्वपूर्ण कवि। कीर्ति का आधार-ग्रंथ ‘रामचरितमानस’। उत्तर भारत के मानस को सर्वाधिक प्रभावित करने वाले भक्त कवि।

समादृत संत और दार्शनिक। पुष्टिमार्ग के संस्थापक और शुद्धाद्वैत के प्रतिपादक।

1930-50 के दौर में लोकप्रिय रहे सुपरिचित नाटककार और रंगकर्मी।

प्राचीन शैली में लिखने वाले आधुनिक कवियों में से एक। अलंकार ग्रंथ 'भारती भूषण' कीर्ति का आधार ग्रंथ।