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छपरा के रचनाकार

कुल: 6

भक्तिकाल के संत कवि। आत्महीनता, नाम स्मरण, विनय और आध्यात्मिक विषयों पर कविताई की। 'निज' की पहचान पर विशेष बल दिया।

समादृत कथाकार। अपने जनवादी कथा-साहित्य के लिए प्रतिष्ठित।

भोजपुरी के सुपरिचित कवि-गीतकार। कवितन-गीतन के साथे-साथ प्रबंध-काव्य, एकांकी आ उपन्यास प्रकाशित। संगठनात्मक स्तर पर भी निरंतर सक्रिय।

भोजपुरी के सम्मानित कवि-गीतकार। आपन रचना में संवेदना, मनुष्यता आ सामाजिक यथार्थ के खातिर उल्लेखनीय। हिंदी में भी लेखन।

नई पीढ़ी के कवि। 'इस कविता में प्रेमिका भी आनी थी' शीर्षक से एक कविता-संग्रह प्रकाशित।

टीकाकार और भक्त कवि।