Font by Mehr Nastaliq Web

यौ बाबू! हद्द भ' गेल!

yau babu! hadd bha gel!

अशोक कुमार दत्त

अशोक कुमार दत्त

यौ बाबू! हद्द भ' गेल!

अशोक कुमार दत्त

और अधिकअशोक कुमार दत्त

    यौ बाबू! आब हद भ' गेल!

    कन्यादान करबा मे बाप बिका गेल!

    जनैत छलहुँ जे देवी एक शक्ति

    जिनका लेल देवो करथि भक्ति

    देवीक पाछाँ घुमैत छल देवो

    सीता लेल मिथिला अयलाह रामो

    मुदा माटियों सँ तुच्छ बेटी भ' गेल

    यौ बाबू आब हद्द भ' गेल!

    सुनैत छलहुँ जे जनकक मिथिला

    मंडन अयाची भारतीक मिथिला

    जतय कोठी बखारी मे लक्ष्मी मुनल छल

    सुग्गो झुमि झुमि देव-भाषा पढ़ै छल

    मुदा उल्लू घर वाणी बन्हक पड़ि गेल

    यौ बाबू आब हद्द भ' गेल!

    जतय हिमालय कहथि 'महान बनू'

    जतंय गंगा कहथि 'दानी बनू'

    गंगा मे पैसि कविकोकिल कहल—

    'सदिखन देवीक सेबी बनू'

    मुदा स्वर्ग-सन मिथिला नरक बनि गेल

    यौ बाबू हे आब हद्द भ' गेल!

    बेटी बाप आन्हर बनल भीख मंगै छथि

    बरक बाप निष्ठुर भ' लात मारैत छथि

    बिनु कलंके बेटी कलंकित भ' गेलि

    घरक लक्ष्मी बेमोल बिकि गेल।

    कतेको कुमारि बेमौत मरि गेल

    यौ बाबू आब हद्द भ' गेल!

    बरागत लोकनि बाघ बनल छथि

    कन्यागतक भक्षण करय

    कखन सँ कानन मे कोइली कनैए

    पाथरक आगू मे दुखड़ा सुनबैए

    बेटीक सिन्दूर शोणित भ' गेल

    यौ बाबू हद्द भ' गेल।

    स्रोत :
    • पुस्तक : झिझिरकोना (मैथिली कविता-संग्रह) (पृष्ठ 30)
    • रचनाकार : अशोक कुमार दत्त
    • प्रकाशन : शेखर प्रकाशन, पटना
    • संस्करण : 2017

    Additional information available

    Click on the INTERESTING button to view additional information associated with this sher.

    OKAY

    About this sher

    Close

    rare Unpublished content

    This ghazal contains ashaar not published in the public domain. These are marked by a red line on the left.

    OKAY