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वह आँसू जो धरती पर नहीं गिरते

wo ansu jo dharti par nahin girte

रिदम राही

रिदम राही

वह आँसू जो धरती पर नहीं गिरते

रिदम राही

और अधिकरिदम राही

    ज़रूरी हो जाता है कभी-कभी

    किसी का आँसू बन जाना भी।

    इस तरह से निकला आँसू

    धरती पर नहीं गिरता,

    वह किसी की आत्मा में सोख जाता है

    वह विलीन नहीं होता

    सींचते हैं हम

    किसी की याद में

    कोई क़िस्सा

    इस तरह आँसू निकलना

    यह सबूत है

    कि रिश्ते की जड़

    अभी भी गहरी है।

    कहने को तो पानी है,

    पर साया है आँसू।

    एहसास बनाए रखते हैं,

    जब भी जिस किसी के लिए निकलते हैं,

    उसी के हो जाते हैं

    ऐसे आँसू

    मिट्टी नहीं होते

    कोई पौधा मुरझाए नहीं,

    इसलिए बह जाते हैं,

    पर वह किसी की आत्मा में सोख जाता है।

    तुम भी जी भरकर रोए होगे

    किसी अपने के लिए

    याद रखो,

    कई तस्वीरों के रंग साफ़ करते हैं

    ऐसे आँसू

    अपनों से दिल की बात करते हैं

    ऐसे आँसू

    जो अकारण नहीं निकलते

    ख़ुद आप ही आते हैं

    और वहाँ तक चले जाते हैं

    जिनके लिए निकले हैं

    स्रोत :
    • रचनाकार : रिदम राही
    • प्रकाशन : हिन्दवी के लिए लेखक द्वारा चयनित

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