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विस्मरण स्मृति की सगी बहन है

vismran smriti ki sagi bahan hai

सुमन शेखर

सुमन शेखर

विस्मरण स्मृति की सगी बहन है

सुमन शेखर

और अधिकसुमन शेखर

    रहते-रहते रहने वाला व्यक्ति

    एक दिन नदारद हो जाता है अचानक

    कभी रह पाने में

    वह इतना गौण हो जाता है

    कि कोई स्मृति भी उसे ठीक-ठाक बचा नहीं पाती

    उस नाम की स्मृति को टटोलने में

    बेलने पड़ जाते हैं पापड़

    सिवाए उसके नाम के

    कुछ भी बचा नहीं रह जाता है स्मृति में

    और कभी तो वह भी नहीं

    उसका चेहरा मिट जाता है

    उसकी आँखों की झुर्रियाँ मिट जाती हैं

    उसके खुले हुए हाथ मिट जाते हैं

    मुस्कुराते हुए में अचानक से दिखते दाँत मिट जाते हैं

    और एक दिन उसका होना मिट जाता है

    स्मृति बहुत शातिर है

    निरंतर में रहे को ही याद रखती है

    विस्मरण स्मृति की सगी बहन है।

    स्रोत :
    • रचनाकार : सुमन शेखर
    • प्रकाशन : हिन्दवी के लिए लेखक द्वारा चयनित

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