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विश्वम्भर अल्हुआ नाम हमर

vishvambhar alhua naam hamar

बुद्धिनाथ झा

बुद्धिनाथ झा

विश्वम्भर अल्हुआ नाम हमर

बुद्धिनाथ झा

और अधिकबुद्धिनाथ झा

    विश्वम्भर अल्हुआ नाम हमर

    हमर परतर इतिहास ककर॥

    (1)

    जकरा घरमे नहि अन्न-पानि

    मडुअहु भऽ जाय जहिना जमाइन

    से कोड़ल लत्ती तामि लीअओ

    ठेँठिअहु कोदारिसँ चालि लीअओ।

    आधहु सेरहु हम ऊफरि जायब

    भूखल नेनाक आहार हएब

    छै लहालोट भेल पेट जकर

    विश्वम्भर अल्हुआ नाम हमर॥

    (2)

    जँ बच्चा अछि भुखले रहैत

    गाँती तरमे अगबे कनैत

    खायत की, नोन सागहु नहि

    चुल्हा भूखल अछि, आगिहु नहि।

    तँ हमर एकटा 'पीस' लीअऽ

    घूरक तरमे ठूसि दीअऽ

    बस मिनिट दसटा जाय दिऔ

    जे भस्म-लेप से झाड़ि लिऔ।

    मुँहक भापहिंसँ फूँकि दिअऽ

    जहिना टूटय से तोड़ि लीअऽ

    चाही तँ अपनहु मुँह धरू

    हम सेरा गेलौं विश्वास करू।

    बच्चा के हाथ धरा देखू

    आब ओकर आँखि धधरा देखू

    अछि हबर-हबर खाय रहल

    आगिक की स्वाद जनाय रहल।

    कहू झड़कल एहन कपार ककर

    विश्वम्भर अल्हुआ नाम हमर॥

    (3)

    यउ सिद्ध-असिद्धक जिकिर नहि

    नोनहुँ नहि हो तँ फिकिर नहि

    काँचहु के दाँतेँ काटि खाउ

    उसिनल के सोहू, हबकि जाउ।

    मेजन जँ नोनहुँ भेटि गेल

    रैंची-अचार के संग भेल

    तँ मोन हम जे तृप्त करब

    के आन करत, तकितहिं रहब।

    हो हमरा सन आकार ककर

    विश्वम्भर अल्हुआ नाम हमर॥

    (4)

    हमर बीआ, हमरे लत्ती

    जुनि छोड़ि दिअऽ हमर खेती

    जँ लत्ती के पुनि नञि लगायब

    हाथक लड्डू के हूसि जायब।

    तँ सुतलोमे बिसुनाइत रहू

    लग्गी लऽ लऽ बौआइत रहू

    अछि मात्र गरीबहि नहि गाहकि

    धनिकहु हमरा ओहिना चाहथि।

    उसिनल अल्हुआ सोहै छथि

    ओकरा निज हाथेँ गूड़ै छथि

    उज्जर धप-धप मम वर्ण देखि

    ताहि पर दही वा दूध देथि।

    चीनी आँजुरसँ फेंटि-फेंटि

    अछञो करथि भरि कर लपेटि

    अह! की थिक स्वाद, उएह जानथि

    खा कऽ आङुर-औंठा चाटथि।

    अस्तित्व एना मेटबैत रहब

    गालहिं तर 'स्व' गलबैत रहब

    केओ आओर भेटय तँ अहाँ कहब

    विश्वम्भर अल्हुआ नाम हमर॥

    (5)

    कथा हमर इतिहासक छी

    आइ हमहीं चेन्ह विकासक छी

    अन्नक अभाव, दीनक दुनियाँ

    घर ढन–ढन बासन, हरमुनियाँ।

    हम अन्नहीन घर-बास करी

    नहि पूँजी पर विश्वास करी

    छल सर्वोपरि हमर नम्मर

    मडुआ छल दोसर विश्वम्भर।

    जहिना हौहटि, कलि-कलि उपटल

    गए जहिना उड़ीस के फल भेटल

    मेघडम्मर, घोघी बिला गेल

    गोनरि, गाँती सब हेरा गेल।

    बूढ़क डाँड़क बटुआ बिलायल

    चढ़ि कोंढ़ इनारक, कऽल आयल

    हम निर्दल नेता भोटक छी

    बिनु पूँजी केर उद्बोधक छी।

    हे दैव, विनय अछि, जुनि बिसरू

    बरु फलहारहु, व्यवहार करू

    तँ हमर करत कि क्यौ परतर

    विश्वम्भर अल्हुआ नाम हमर॥

    विश्वम्भर अल्हुआ नाम हमर

    हमर परतर इतिहास ककर॥

    स्रोत :
    • पुस्तक : अक्षर निर्क्षर (मैथिली काव्य-संग्रह) (पृष्ठ 65)
    • रचनाकार : बुद्धिनाथ झा
    • प्रकाशन : क्रिएटिव कैम्पस प्रकाशन, हैदराबाद
    • संस्करण : 2015

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