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वक़्त के आर-पार

vaqt ke aar paar

रश्मि रमानी

रश्मि रमानी

वक़्त के आर-पार

रश्मि रमानी

और अधिकरश्मि रमानी

    दिन ने समेट लिए हैं

    अपने पंख

    और सुनहरी साँझ

    ले रही है विदा

    सूरज की आख़िरी चमकीली किरण से

    लिख दो

    तुम मेरा नाम

    बादल के फीके आँचल पर

    शायद ही याद रहे तुम्हें

    ये इंद्रधनुषी साँझ

    पर ख़ामोश नीली रातों में

    याद करके तुम्हें

    मैं कुतरती रहूँगी नाख़ून

    ख़ुशियों का

    नन्हा-सा सफ़र

    तय किया है तुम्हारे साथ

    ज़िंदगी बहुत लंबी लगती है

    लंबी ज़िंदगी के नन्हें सफ़र की यादें

    समेट कर अनुभूतियों के दामन में

    मैं निहारूँगी हर साँझ को

    खोजूँगी

    अपने नाम के बादल के टुकड़े को

    और, धीरे से मुस्कुरा दूँगी।

    स्रोत :
    • पुस्तक : साज़ चुप है (पृष्ठ 19)
    • रचनाकार : रामकृष्ण प्रकाशन
    • प्रकाशन : रश्मि रमानी
    • संस्करण : 1997

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