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उलौहल-कनफुसौवल

ulauhal kanaphusauval

आशाराम ‘जागरथ’

आशाराम ‘जागरथ’

उलौहल-कनफुसौवल

आशाराम ‘जागरथ’

और अधिकआशाराम ‘जागरथ’

    भागौ बहिनी कछु ना बोलौ

    सुनि ल्या कतहूँ ना किह्यू जिकर

    बड़की बखरी मा नधा बाय

    दुइ दिन से करकच-दहकच्चर

    छोटकी पतोह विधवा बाटै

    पेटे मा लिहे पाप बाटै

    सासू से लड़त पुरहरे बा

    कि तोहरे जाती भै बाटै

    ना सूई-फार करब अबकी

    मानब ना बइठब सउरी मा

    यकतनहा नीम कै पेड़ गवाह

    बचा बा पाहीमाफी मा

    नाउन भउजी बखरी कै खास

    आइन दौरी वै बदहवास

    गोहराय कै बोलिन हमहूँ से

    बेवा रानी चलि बसीं आज

    गोली से भरी रही पिस्टल

    जानिन कि धरी बाय छूछै

    खटका दबि गै अनजाने मा

    छतिया छलिनी-छलिनी होइगै

    देखतै-देखत हमरी आँखी

    गिरि परीं धड़ाम जमीनी मा

    यकतनहा नीम कै पेड़ गवाह

    बचा बा पाहीमाफी मा

    भइँसिया खड़ी बम्मात बाय

    गइया नाहीं पगुरात बाय

    पिल्लन के साथ कुकुरियौ अब

    घर छोड़ि कहूँ काँ जात बाय

    मुसरी बोलै चूचू-चूचू

    नरदहा छछुंदर चिक-चाऊँ

    करखही बिलरिया देखे बा

    पंजा मारै माऊँ माऊँ

    सनपाती पड़िया भोकरत बा

    मूड़ी उठाय कै बाँ बाँ बाँ

    यकतनहा नीम कै पेड़ गवाह

    बचा बा पाहीमाफी मा

    बेवा बूआ गुस्सान रहीं

    आयीं औ’ चली गयीं जल्दी

    बइठका बइठा घिरा हये

    थान्हें कै बड़े दरोगा जी

    वै कहअ थैं चीर-फार होई

    बड़के मालिक रिरियात हये

    केव कहत बा मान गये बाटे

    अब खुदै फुकावै जात हये

    तर-उप्पर मनई जमा हये

    सरसौ ना गिरै जमीनी मा

    यकतनहा नीम कै पेड़ गवाह

    बचा बा पाहीमाफी मा

    सुवर चरावै आय रही

    पेड़े के तरे छहाँत रही

    लहचोरा पिपरे कै गोदा

    चटकारा दइकै खात रही

    यक बड़ा-बड़कवा आइ गये

    सन्हें से सनकारै लागै

    जब बात सुनिस नाहीं वनकै

    छपकी लइकै मारै लागे

    बोले तू हियाँ से भागि जाव

    फिर गोड़ धरिव खेते मा

    यकतनहा नीम कै पेड़ गवाह

    बचा बा पाहीमाफी मा

    बतिया मन-भित्तर धरे रही

    मनमाफिक मौका तड़त रही

    रोवाँ केवाँच कै पुड़िया मा

    धोती-कोने गठियाये रही

    रहा चपरहा जात रहा

    मुँह दाबे पान चबात रहा

    कपड़ा निकारि जुट्टा उप्पर

    ताले मा पौंड़ि नहात रहा

    चल दिहिस पहिरि उज्जर कपड़ा

    अड़बंग लागि कुछ देहीं मा

    यकतनहा नीम कै पेड़ गवाह

    बचा बा पाहीमाफी मा

    पहिले चुनचुन चुन चुनचुनान

    फिरु खबर-खबर खजुवाय लाग

    छेदै मानौ मधु कै माछी

    आँड़य आँड़ा भाला कै धार

    आँगा निकारि भागै दउरै

    चिल्लाय बार रहि-रहि नोचै

    धूरी-माटी मा लोटि-पोट

    बालू कंडा गोबर रगरै

    हाय रे दइया ! जानेन नाहीं

    जहर मेंड़ के जुट्टा मा

    यकतनहा नीम कै पेड़ गवाह

    बचा बा पाहीमाफी मा

    स्रोत :
    • पुस्तक : पाहीमाफी (पृष्ठ 197)
    • रचनाकार : आशाराम ‘जागरथ’
    • प्रकाशन : रश्मि प्रकाशन, लखनऊ
    • संस्करण : 2021

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