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हरे रामा, लड़कै चली गुड़ पनिया

hare rama, laDakai chali guD paniya

मनोज मिश्र ‘कप्तान'

मनोज मिश्र ‘कप्तान'

हरे रामा, लड़कै चली गुड़ पनिया

मनोज मिश्र ‘कप्तान'

और अधिकमनोज मिश्र ‘कप्तान'

    हरे रामा, लइकै चली गुड़ पनिया, बजत पैजनियाँ, रे हारी,

    सिर ऊपर कलस सँभारे,

    इत उत सीवान निहारे,

    हरे रामा, नजर रखय चौकनियाँ, बजत पैजनियाँ, रे हारी

    श्रम स्वेद सरोवर डूबी,

    लागय वह परी अजूबी,

    हरे रामा, मंद मंद मुस्कनियाँ, बजत पैजनियाँ, रे हारी

    पंकिल जल चरण पखारे,

    जब पगडंडी पग धारे,

    हरे रामा, धन्य भए लखि धनिया, बजत पैजनियाँ, रे हारी

    जल एहि विधि पतिहिं पियावै,

    रति मनहुँ 'मनोज' जिमावै,

    हरे रामा, स्वामी के संग स्वामिनियाँ, बजत पैजनियाँ, रे हारी,

    स्रोत :
    • पुस्तक : अवधी मिठास (पृष्ठ 52)
    • रचनाकार : मनोज मिश्र ‘कप्तान’
    • प्रकाशन : सर्वभाषा प्रकाशन, नई दिल्ली
    • संस्करण : 2025

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