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तनी जगइहऽ पिया

tani jagihऽ piya

प्रकाश उदय

प्रकाश उदय

तनी जगइहऽ पिया

प्रकाश उदय

और अधिकप्रकाश उदय

    आहो-आऽहो...

    रोपनी के रँउदल देहिया साँझहीं निनाला

    तनी जगइहऽ पिया

    जनि छोड़ि के सुतलके सुती जइहऽ पिया

    आहो-आऽहो...

    हर के हकासल देहिया साँझहीं निनाला

    तनी जगइहऽ धनी

    जनि छोड़ि के सुतलके सुती जइहऽ धनी

    आहो-आऽहो...

    चूल्हा से चउकिया तक ले

    देवरू-ननदिया तक ले

    दिनवा दुनिया भर के

    रतिए हउए आपन, जनि गँवइहऽ पिया

    धइ के बँहिया माथ, बतियइहऽ पिया

    आहो-आऽहो...

    घर से बधरिया तक ले

    भइया-भउजइया तक ले

    दिनवा दुनिया भर के

    रतिए हउए आपन, जनि गँवइहऽ धनी

    धइ के बँहिया माथ, बतियइहऽ धनी

    आहो-आऽहो...

    दुखवा दुहुरवला बिना

    सुखवा सुहुरवला बिना

    रहिए ना जाला, कि ना!

    कइसन दो लागे, जनि संतइहऽ पिया

    कहियो रुसियो-फुलियो जाईं मनइहऽ पिया

    आहो-आऽहो...

    काल्हु के फिकिरिए निनिया

    उड़ि जाय जो आँखिन किरिया

    आके पलकन के भिरिया

    सपनन में अझुरइहऽ, सझुरइहऽ धनी

    जनि छोड़ि के जगलके सुती जइहऽ धनी

    जनि छोड़ि के सुतलके सुती जइहऽ पिया...

    स्रोत :
    • पुस्तक : अरज-निहोरा (पृष्ठ 34)
    • रचनाकार : प्रकाश उदय
    • प्रकाशन : राजकमल प्रकाशन
    • संस्करण : 2020

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