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sujhav

दू टा महाशक्ति

जहिया कहियो लड़ल

अपनाकेँ नष्टे टा कयलक।

दुनियाँ एकटा विशाल रंगमंच अछि

आचार्य लोकनि कहने छथि।

रंगमंच हमरा लोकनिक जीवन अछि।

कखनो कऽ

जीवनक लेल संघर्ष आवश्यक भऽ जाइत छैक।

संघर्षसँ लोकक परिचय

ओकर शक्ति, ओकर लक्ष्य

फरिछाइत छैक,

तैयो एहिसँ शान्तिक अपेक्षा करब व्यर्थ

लोक जितियो कऽ पराजित रहैत अछि।

जँ लड़ब हमरा लोकनिक अस्तित्वक लेल

अनिवार्य अछि, तँ लड़ब,

मुदा ध्यान राखब—

लड़ाइ जीबाक लेल हेबाक चाही,

मरबाक लेल नहि।

मरबाक लेल किन्नहुँ नहि।

स्रोत :
  • पुस्तक : एक गुलाबक लेल (पृष्ठ 48)
  • रचनाकार : छत्रानन्द सिंह झा
  • प्रकाशन : नीलकण्ठ प्रकाशन, पटना
  • संस्करण : 1988

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