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स्तन-स्त्रीलिंग

stan striling

गरिमा सिंह

गरिमा सिंह

स्तन-स्त्रीलिंग

गरिमा सिंह

और अधिकगरिमा सिंह

    माँस का पिंडनुमा—

    हृदय पर रखा हुआ बोझ…

    जो ख़ुद जीता है—

    अपने नीचे एक स्त्री को दबाकर…

    जहाँ कि स्त्रीलिंगी-गोलाईयों के भीतर ही—

    रचा जाता है सभ्यता और संस्कृति का सारा छद्म…

    साहित्य में इस वर्तुलाकार घेरे में ही,

    लिखा जाता है एक कालातीत महाकाव्य…

    जिसे प्रेमी; बार-बार चाहता है—

    निरखना और महसूसना…

    कि जिसे बार-बार परखती है ममता…

    और जिसके स्पर्श का आकांक्षी है—

    विकृति का एक पूरा तंत्र…

    एक लड़की जिसे अपनी प्रत्येक अवस्था में—

    शारीरिक बदलाव गुनगुनाता हुआ…

    अचंभित करता था!

    समझदारी की अवस्था में—

    वह ख़तरनाक असहनीय दर्द बनकर…

    त्याज्य प्रतीत होता है!!

    स्रोत :
    • रचनाकार : गरिमा सिंह
    • प्रकाशन : हिन्दवी के लिए लेखक द्वारा चयनित

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