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स्पर्श-रेखा

sparsh rekha

सुमित मिश्र गुंजन

सुमित मिश्र गुंजन

स्पर्श-रेखा

सुमित मिश्र गुंजन

और अधिकसुमित मिश्र गुंजन

    खखड़ी सन फोंक

    मरुभूमि सन अपटी

    शून्य अछि जीवन-वृत्त

    दू पाइ पर आश्रित अछि

    हमर सम्पूर्ण परिधि

    खुटेसल पठरू जकाँ

    त्रिज्या पर ठाढ़

    औना रहल छी

    घुरिया रहल छी

    परिधि केन्द्रक मध्य

    हे प्रिये

    अहाँ एकटा सरल रेखा छी

    हमरा सँ बहुतो फराक

    इच्छा त' यैह छल जे

    अहाँ विच्छेद करितहुँ जीवन-वृत्त केँ

    छूबि लिहुँ हमर केन्द्र

    मिझरा जयतहुँ त्रिज्या सँ

    फेरो बनि जयतैक व्यास

    मुदा

    हम जनैत छी

    घून लागल अपन जीवनक गाछ केँ

    गाछ—

    जकरा बारि देने अछि जंगल

    त्यागि देने अछि बगरा

    जाहि पर आब नहि फुलाइत अछि

    कोनो सेहन्तगर फूल

    वा कोनो मिठगर फल

    अहाँ भरिसक

    परिधि केँ छूबैत चलि जायब

    अनमन स्पर्श-रेखा जकाँ

    एम्हर स्पर्श-बिंदु पर

    लंबवत होयत हमर त्रिज्या

    अनन्त समयक लेल!

    स्रोत :
    • पुस्तक : पेटकुनियाँ लधने प्रश्न (पृष्ठ 21)
    • रचनाकार : सुमित मिश्र गुंजन
    • प्रकाशन : नवारम्भ, पटना/मधुबनी
    • संस्करण : 2024

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