शब्द जो घाव भरते हैं
shabd jo ghaav bharte hain
भाषा से एक पूरी दुनिया उजागर करने की प्रतीक्षा में, कोई गा रहा है उस जगह के लिए जहाँ मौन का संभवन होता
है।
बाद में यह दिखाया जाएगा कि अपना क्रोध अभिव्यक्त कर लेने से यह समुद्र—या यह दुनिया—अस्तित्व पा नहीं
लेते। ठीक वैसे ही जैसे हर शब्द केवल वही कहता है जो वो कहता है—और उसके आगे, कुछ ज़्यादा या कुछ और।
- पुस्तक : सदानीरा पत्रिका
- संपादक : अविनाश मिश्र
- रचनाकार : कवि के साथ अनुवादक रिया रागिनी, प्रत्यूष पुष्कर
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