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समय

samay

भीड़ में चलना हमारे लिए कठिन हो गया है

कितनी ही शक्ति हमारी शत्रु हैं

और कितनी ही आकांक्षाएँ।

उतर आई हैं अशुभ शक्तियाँ

पथिकों के कंधों और चेहरों पर।

हम निकल आएँगे किनारे की तरफ़

उस पहाड़ी पर जहाँ खड़ा है एक प्राचीन स्तंभ,

हम बैठेंगे वहाँ।

उतर आएँगी सारी शक्तियाँ

और हम प्रतीक्षा करेंगे।

यदि पावन चिन्हों के विषय में

कोई समाचार मिले तो हम भी प्रयास करेंगे।

और यदि कोई उन्हें हमारे पास लाया

तो हम सम्मानपूर्वक खड़े हो जाएँगे।

हम देखेंगे आँख खोलकर,

कान खोलकर सुनेंगे।

हम समर्थ होंगे, कामना करेंगे

और निकल आएँगे बाहर जब आएगा वह

समय।

स्रोत :
  • पुस्तक : निकोलाई रेरिख की कविताएँ (पृष्ठ 20)
  • रचनाकार : निकोलाई रेरिख
  • प्रकाशन : रेरिख अध्ययन परिषद, नई दिल्ली
  • संस्करण : 1995

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