समानधर्माक नाम
samandharmak naam
एगो बात कहियौ भाय!
अपना गाममे तेज बसात त' उठलैए
मुदा ओ बिरड़ो-ए बनि रहि गेलैए
आ किछु गदौस उड़ा शांत भ' जाइत रहलैए
जँ ओ बिहारि होइतै त' ओकर कोनो दिशा अबस्से होइतै
महामारी के उड़ा ल' जेबाक काज अबस्से करितै
नै त' इहो त' करितै जे सोङर-साङर लगाओल घर के खसा
नब घर बन्हबाक चारनि त' दितै
तें हम महाबिहाड़िक कामना करै छी, किए त'
ओकर अभावमे सगरे गाममे ओबा-टुनकी पसरल जाइ छै
भाय एगो बात कहियौ!
बसात द्वारा पठाओल समाद
सभक लग पहुँचियोक'
ककरो लग नै पहुँचि पबै छै?
भाय! एको मिसिया नै सोहाइए गामक मठ पर लुधकल
उजरा परबाक उद्धत चिक-चिक नाच
परबा स' भरोस नै राखल जा सकैए आर
ओ प्रेम-पत्र त' उघि सकैए मुदा
क्रान्तिक सनेस बिलहि नै सकैए?
हमरा डर सेहो ऐ भाय जे कतौ ई फेर
पछबरिया बाधे स' 'पार्थेनियम' बीया ने
चारा ल' आनय अपन गेल्ह सभ लेल आ
ओ बीया किनसाइत हमर गामक माटि पकड़ि
चतरि जाय फेर
आ गाममे पसारि दिअ-ए फेर वैह सुगर चामा बियाधि
जे बुढ़िया बाढ़िक पछाति स'
पसरल रहै ऐठाम
- पुस्तक : ऐ अकाबोन मे (मैथिली कविता-संग्रह) (पृष्ठ 21)
- रचनाकार : राज
- प्रकाशन : नवारम्भ, पटना
- संस्करण : 2011
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