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प्रेमपत्र-2 प्रेम-अपरजिता

prempatr 2 prem aparajita

सुमित मिश्र गुंजन

सुमित मिश्र गुंजन

प्रेमपत्र-2 प्रेम-अपरजिता

सुमित मिश्र गुंजन

और अधिकसुमित मिश्र गुंजन

    पाथर पर जनमल दूभि देखि

    सरिपहुँ मोन पड़ि जाइत अछि अपन प्रेम

    बेर-बेर मूड़ी खोंटलाक बादो

    पनकैत रहल अछि निरंतर

    हमर हृदय सँ अहाँक हृदय धरि

    एकटा नम्हर सुरंग अछि

    जकर एक दिस गुजगुज अन्हार

    दोसर दिस भकइजोर

    एहि पार सँ ओहि पार धरिक

    यात्रा थिक प्रेम

    स्वीकार करै छी

    हमर हिया एहि देश सन अछि

    जतय गरीबी भ्रष्टाचार जकाँ

    व्याप्त छी अहाँ

    अहाँ हरित-लवक जकाँ मिझरायल छी

    हमर हरियर कचोर मोन मे

    जतय फुलाइत अछि

    उज्जर-उज्जर आस

    सदिखन मुस्कियाइत अछि

    पुरबा बसातक गुदगुदी सँ।

    स्रोत :
    • पुस्तक : पेटकुनियाँ लधने प्रश्न (पृष्ठ 80)
    • रचनाकार : सुमित मिश्र गुंजन
    • प्रकाशन : नवारम्भ, पटना/मधुबनी
    • संस्करण : 2024

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