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प्रेमपत्र-1 अ-नामिका

prempatr 1 a namika

सुमित मिश्र गुंजन

सुमित मिश्र गुंजन

प्रेमपत्र-1 अ-नामिका

सुमित मिश्र गुंजन

और अधिकसुमित मिश्र गुंजन

    हम-अहाँ दू टा व्यक्तिवाचक

    जकर मध्य भाववाचक संज्ञा जकाँ

    डोलैत रहैत अछि प्रेम

    निर्वात मे चिकरब

    अथाह केँ थाहब

    अनन्त केँ व्यक्त करब

    सभटा काज निरर्थक होइत छैक

    तेँ

    नहि लिखलहुँ एक्कहु टा आखर

    वर्षा ऋतुक कोइली जकाँ

    धयने रहलहुँ गुम्मी

    अंगेजने रहलहुँ सभटा प्रेमक भाव

    मुदा नहि चलल कोनो जूति

    सशक्त जननायक बनि

    अभिव्यक्तिक स्वतंत्रता लेल

    आवाज उठौलक कलम

    एकटा जोरगर द्वंद्वक बाद

    अभिव्यक्त करय पड़ि रहलए

    चपोतिक' राखल मोनक भाव केँ

    लिख' पड़ि रहलए प्रेमपत्र

    अहींक नाम

    'अ-नामिका'।

    स्रोत :
    • पुस्तक : पेटकुनियाँ लधने प्रश्न (पृष्ठ 79)
    • रचनाकार : सुमित मिश्र गुंजन
    • प्रकाशन : नवारम्भ, पटना/मधुबनी
    • संस्करण : 2024

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