Font by Mehr Nastaliq Web

प्रेममे...

premme. . .

दीप नारायण

दीप नारायण

प्रेममे...

दीप नारायण

और अधिकदीप नारायण

    (एक)

    एकटा बरफ खाइत बेदरा

    अबैछ घर जखन

    बाँचल रहैछ

    ओकरा लकटीमे

    बरफ जतेक।

    बस!

    ओतबे जग्गह चाही

    हृदयमे प्रेमक लेल।

    (दू)

    जखने अहाँ ककरोसँ

    कहैत छियैक—

    'हम अहाँसँ प्रेम करैत छी।’

    अहाँ अपन सम्पूर्ण आजादी

    समाप्त क' दैत छियै।

    (तीन)

    'हम अहाँसँ प्रेम करैत छी।’

    एकर सोझ-सोझ मतलब छैक

    अहाँ हमरासँ

    बेसी महत्पूर्ण छी।

    (चारि)

    प्रेम एकटा जहर छैक

    बहुत मीठ जहर...।

    प्रेममे जा धरि

    स्वयंकेँ अहाँ

    मटिआमेट नहि क' दैत छियै

    बूझिए नहि पेबैक अहाँ

    प्रेमकेँ।

    (पाँच)

    एकटा अनाम

    अदृश्य शक्ति

    हमरा-अहाँकेँ

    भेंट-घाँट करओलक।

    साइत,

    पूर्व जन्मक प्रेम

    शेष छल।

    (छह)

    हम सोचैत रही...।

    अहाँ बिहुँसि जाएब

    बदाम जकाँ

    हमर साँसक उष्मा

    ठोरक नमी पाबि।

    मुदा,

    कि हमर प्रेमक आगा

    ओछ भ' गेल आँचर अहाँक।

    (सात)

    अहाँक मान

    अहाँक अपमान

    अहाँक प्राण...।

    छूबि क' देखियौक

    हृदयसँ हृदय।

    प्रेम करब कोनो दोख नहि छैक।

    (आठ)

    अत्माक बीचोबीच

    बरलै, एक दिन

    प्रेमक दूधिया जोति।

    छिड़िया गेलैक

    जीवन हमर

    सात रंगमे

    इंद्रधनुष जकाँ।

    (नओ)

    सुनै छियैक—

    प्रेम कहियो खतम नहि होइत छैक

    रूप बदलि-बदलि क'

    अबैत छैक जीवनमे।

    घरक चार पर

    पाँखि कोरिअबैत फुद्दी

    कहीँ हमर प्रेम त' नहि।

    (दस)

    हम किछु बाजी

    कि अहीँ

    कोनो खगता नहि।

    अहाँ देखैत रही हमरा

    हम अहाँक एकटक

    बिनु शब्द भाषाकेँ

    होबए दियौक प्रेम।

    (एगारह)

    अहाँक संग भेँट-घाँट

    अहाँक संग गपसप

    अहाँ हाथक—

    तीमन-सोहारी।

    हमरा लेल...

    उत्सव।

    (बारह)

    रेलक पटरी

    एक-दोसराक

    दुखकेँ बुझैत त' छैक।

    मुदा,

    दुनू मिलैत नहि छैक कखनो।

    जेना,

    एखन

    हम अहाँ।

    (तेरह)

    नहि चाही हमरा

    धन-संपत्ति

    नाम

    इज्जति

    'सोहरति'।

    ईश्वर!

    हमरा दिय

    हमर प्रेमक सामर्थ्य।

    (चौदह)

    जेना कवितामे रहैत अछि कविता

    रौदमे गर्माहटि

    इजोरियामे इजोत

    फूलमे सुगन्धि

    मधुमे मीठ।

    घामक बुन्नीमे मिझर रहैछ जेना नोन

    हरियर पातमे क्लोरोफिल

    जेना गम्हड़ाएल गहूममे दूध।

    गाममे जुगक-जुगसँ अबैत

    लोक कथा रहैछ जेना।

    कोनो बेदराक तोतराइत बोलीमे

    जेना रहैत अछि माए।

    तहिना हमरामे अहाँ

    अहाँमे हम

    शब्दमे अर्थ

    भाषामे व्याकरण जकाँ।

    स्रोत :
    • पुस्तक : आब कतेक चुप रहू (मैथिली कविता-संग्रह) (पृष्ठ 33)
    • रचनाकार : दीप नारायण
    • प्रकाशन : राजकमल प्रकाशन, नई दिल्ली
    • संस्करण : 2021

    Additional information available

    Click on the INTERESTING button to view additional information associated with this sher.

    OKAY

    About this sher

    Close

    rare Unpublished content

    This ghazal contains ashaar not published in the public domain. These are marked by a red line on the left.

    OKAY