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पवित्र चिन्ह

pavitra chinh

निकोलाई रेरिख

निकोलाई रेरिख

पवित्र चिन्ह

निकोलाई रेरिख

और अधिकनिकोलाई रेरिख

    हम नहीं जानते। पर वे जानते हैं।

    पत्थर जानते हैं

    यहाँ तक कि पेड़ भी।

    उन्हें याद है

    याद हैं जिन्होंने पहाड़ों और नदियों को नाम दिए

    नाम दिए स्मरणातीत देशों को,

    ज्ञानातीत शब्द प्रदान किए,

    निर्मित किए अनेकों नगर।

    वे सम्पन्न हैं अर्थ-वैभव से

    और महान कार्यों से पूर्ण

    हर जगह अवतरित हुए हैं महान नायक।

    'जानना' शब्द मीठा होता है

    और 'याद रखना'—भयावह।

    जानना और याद रखना

    याद रखना और जानना

    अर्थात् विश्वास करना

    उड़ा करते थे वायुयान

    बरसा करती थी तरल आग

    चमका करती थीं चिंगारियाँ

    जन्म और मृत्यु की।

    आत्मा की शक्ति से

    उठ खड़े होते थे पत्थरों के ढेर

    ढाली जाती थी तलवारें चमत्कारी

    ज्ञान से भरे रहस्यों को

    सुरक्षित रखा है ग्रंथों ने।

    पुनः स्पष्ट हो गया है सब कुछ

    नई-नई है हर चीज़,

    गाथाओं ने धारण कर लिया है जीवन का रूप,

    और हम पुनः जीने लगे हैं

    हम पुनः बदल जाएँगे

    और पुनः मिट्टी में मिल जाएँगे।

    महान 'आज' निष्प्रभ पड़ जाएगा कल।

    पर प्रकट होंगे पवित्र चिन्ह।

    जब ज़रूरी होगा

    उन्हें कोई नहीं देखेगा।

    किसे मालूम?

    पर वे जीवन का निर्माण करेगे।

    कहाँ हैं वे

    पवित्र चिन्ह?

    स्रोत :
    • पुस्तक : निकोलाई रेरिख की कविताएँ (पृष्ठ 9)
    • रचनाकार : निकोलाई रेरिख
    • प्रकाशन : रेरिख अध्ययन परिषद, नई दिल्ली
    • संस्करण : 1995

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