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पकौड़ा शास्त्र

pakauDa shaastr

मोहनलाल यादव

मोहनलाल यादव

पकौड़ा शास्त्र

मोहनलाल यादव

और अधिकमोहनलाल यादव

    सहँगू काका के अन्तर्मन मनोकामना एक

    डबलू इंटर पास कई लिहेस करवउबै बीटेक।

    खुसी-खुसी परवेस परीच्छा के फारम भरवाए

    मोटर साइकिल पर बिठाइके सेंटर तक पहुँचाए,

    रहा डबलुआ लायक, काका के राखेस बिसवास

    आँखी फोड़ेस रात-दिना करेस परिच्छा पास।

    काका के मन भवा मुरैला लड्डू खुब बँटवाए

    गहना गुरिया गेहूँ चावल बेचिके नाम लिखाए,

    बिसहि दिहेन लैब टाप खुसी में एक चाइना मेक

    बेटवा इंटर पास कइ लिहेस करवउबै बीटेक।

    पाँच साल में पूरा होइग इंजिनीयरी के कोर्स

    पूत भवा इंजीनियर तब काका के बढ़िग फोर्स,

    मोल तोल खुब होइ लाग जब चली वियाह के बात

    दान-दहेज मिला जिव भरिके सान से गई बारात

    गोरी-चिकनी सुन्नर दुलहिन पायेस एम. ए. पास

    गुनी पतोहू मिली, काकी के धोती उड़ै अकास,

    काका बतलाएन काकी के समधिउ बहुतइ नेंक

    बेटवा इंटर पास कइ लिहेस करवउबै बीटेक।

    नाहीं मिली नौकरी डबलू भए कौड़ी के तीन

    बिना कमाई इज्जत नाहीं रहइ लगे गमगीन,

    काका बोलेन बेचि-बिकिन के बिन औकात पढ़ावा

    बैठे काम चली बेटवा कुछ कमाई के लावा।

    बीबी रोज करइ फरमाइस सूझइ नहीं उपाय

    सड़क किनारे डबलू बेचइँ लगे पकौड़ा-चाय,

    इंजिनीयरी के डिगरी तब भट्ठी मे दिहलेन फेंक

    वेटवा इंटर पास कइ लिहेस करवउबै बीटेक।

    स्रोत :
    • पुस्तक : अलगौझी (पृष्ठ 59)
    • रचनाकार : मोहनलाल यादव
    • प्रकाशन : हंस प्रकाशन, नई दिल्ली
    • संस्करण : 2023

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