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नोटिफिकेशन

notiphikeshan

पंकज बिंदास

पंकज बिंदास

नोटिफिकेशन

पंकज बिंदास

और अधिकपंकज बिंदास

    नोटिफिकेशन आ गया

    उसकी पथरीली आँखों में तेज़ आया

    जीवन की संचित ज्ञान-पूंजी

    वह उड़ेल सकता है

    महज़ एक ओएमआर शीट पर।

    नोटिफिकेशन आ गया

    जैसे दीपावली से एक दिन पहले

    दिल्ली रेलवे स्टेशन पर

    आती है कोई ट्रेन हाँफती हुई।

    गहरे पानी के अंधकार में

    जैसे मछलियों का जत्था

    लपक पड़ता है मांस के गोले पर।

    जलवायु परिवर्तन से असहाय

    अपने अस्तित्व की लड़ाई में

    नवजात मेमने पर जैसे—

    टूट पड़ते हैं खाने को शाकाहारी भी।

    नोटिफिकेशन आ गया

    लाइब्रेरियाँ भरने लगी

    सबको लग रहा है अब

    समाज हमें आदर देगा

    सिर्फ़ मैं ही नहीं कॉल करूँगा किसी को

    किसी का कॉल आएगा मुझे भी।

    सबको लग रहा है अब

    समुद्री तूफान में हमें रास्ता मिल जाएगा

    अमेज़न के जंगल में हमें

    बचाने को आएगा हेलीकॉप्टर।

    नोटिफिकेशन आ गया

    और खा गया कुछ महीनो में ही

    लाखों सपनों का अचार

    संघर्षों का मुरब्बा

    और सब्र का गरमागरम सूप।

    ज्ञान के मैदान में

    सरस्वती का हार जाना

    कितना अजीब है

    खैर, लक्ष्मी ख़ुश है।

    स्रोत :
    • रचनाकार : पंकज बिंदास
    • प्रकाशन : हिन्दवी के लिए लेखक द्वारा चयनित

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