एक क्षण होता है
किसी आकृति के जमकर ठोस रूप लेने से पहले,
किसी रंग के चढ़ने से पहले
किसी कील के ठुकने या तपने से पहले
कोई चिट्ठी अभी भी लेटर बॉक्स से बाहर निकाली जा सकती है
कोई हाथ कुहनी से पकड़कर पीछे खींचा जा सकता है,
कोई शब्द गले की नाड़ी और
कमरे की हवा में बढ़ती
तेज़ आवाज़ के बीच ही बचा लिया जा सकता है
एक चींटे की छाती इतनी भी तंग नहीं होती
जितनी ज़्यादा ताँबे के ऊपर हरी ज़ंग चढ़ आती है
फिर भी कुछ न कुछ उससे बचकर निकल ही जाता है—
आस-पास नज़र घुमाता है,
एक नई दिशा तय करता है, दूसरे देश की ओर
किसी देशनिकाले में नहीं, किसी आशा में भी नहीं
बस कुछ पूरी तरह बदला हुआ-सा
जैसे एक रेत से लदे ट्रक का रास्ता अचानक बदल गया हो
उसे सिल्क रोड कहते ही;
जहाँ से वापस नहीं लौटा जा सकता।
- पुस्तक : सदानीरा पत्रिका
- संपादक : अविनाश मिश्र
- रचनाकार : जेन हर्शफ़ील्ड
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