निक लागै होठवा पै धरा जौ अँगुरिया
nik lagai hothva pai dhara jau anguriya
परवाना प्रतापगढ़ी
Parwana Pratapgarhi
निक लागै होठवा पै धरा जौ अँगुरिया
nik lagai hothva pai dhara jau anguriya
Parwana Pratapgarhi
परवाना प्रतापगढ़ी
और अधिकपरवाना प्रतापगढ़ी
दुइनौ नैना तोहार बड़ा प्यारा लगै,
तोहरे मथवा कै बिंदिया सितारा लगै,
गोरे-गोरे गलवा पे चमकै बिजुरिया,
निक लागै होठवा पै धरा जौ अँगुरिया,
तोहरे कजरा कै धार तौ किनारा लगै।
दुइनौं नैना...
खोय गवा मनवा कै चैन तोरे खेल मा,
जरै लाग दियना अब अँसुवन के तेल मा,
तोरी तिरछी नजरिया इसारा लगै
दुइनाँ नैना...
रस बरसै तोहरे पिरितिया कै बोली,
'परवाना' भेद नाही जियरा कै खोली,
ठेस जिव मा न हमरे दुबारा लगै
दुइनौं नैना...
- पुस्तक : रस गागरी (पृष्ठ 33)
- रचनाकार : परवाना प्रतापगढ़ी
- प्रकाशन : अभिव्यक्ति संगम, साहित्यिक संस्था, लालगंज प्रतापगढ़
- संस्करण : 2013
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