Font by Mehr Nastaliq Web

नए रंग की तलाश

ne rang ki talash

सुशील कुमार

सुशील कुमार

नए रंग की तलाश

सुशील कुमार

और अधिकसुशील कुमार

    कैनवस पर

    इन दिनों वह

    आज़ादी के इतने सालों की

    तमीज़ से गुज़रे हुए

    एक आदमी की तसवीर

    उकेरने की तदबीरें करता रहा है

    पर रंगों की असहमति ने

    अपनी दुनिया से बेदखल कर

    उसे हर बार

    अपनी ऊब के साथ

    आदमी की भीड़ से दूर,

    कहीं सुनसान में

    ला खड़ा किया है

    जहाँ विचारों की भीड़ में

    वह हमेशा

    एक बेरंग बेलौस

    चेहरे से मिलता रहा है

    जिसमें हिंदुस्तान की पूरी तफ़सील मौजूद है।

    कैनवस पर

    इन दिनों

    हाथ और रंग के बीच

    एक लड़ाई-सी छिड़ी हुई है

    आँखें गवाह हैं कि कूचियाँ

    रंगों के पक्ष में चली गई हैं ,

    लकीरें भी लीक से हट गई हैं

    रंग बिफ़रते हैं कि

    हाथ की गिरफ़्त में

    अब उसकी रौनकें बिगड़ रही हैं

    गोया कि, हिंदुस्तान कोई

    घिसा-पीटा बदरंग आदमी का

    खंडहर नहीं हो सकता।

    वह तो

    चिकने चेहरों पर चमकता है

    कुर्सी पर आसीन रहता है

    अपनी हुलिया का रोब-ग़ालिब करता है

    अपने मातहतों में

    और लश्कर के साथ

    सड़कों पर धूल उड़ाता चलता है

    चमचमाती गाड़ियों में।

    रंग भी उसी के साथ चलना चाहते हैं।

    पर चित्रकार को इतने सालों के

    रंगसाजी का अनुभव बेचैन करता है कि

    रंग यहाँ तरह-तरह के हैं

    जिन पर रंग अभी चढ़े हैं

    वे सब सुशासन के मुखौटे हैं

    असली चेहरा तो

    उस आदमी का है

    जो सपनों को अपनी

    पीठ पर लाद कुटिल जनपथ पर

    खाली पाँव चल रहा है वर्षों से

    और झुर्रियों की दुकान बन

    अब बाज़ार में लटक रहा है

    उसे गौर से देखो

    उसका रंग कितना उतर गया है!

    वह आदमी स्वशासन के इतने सालों से

    राहें ताक रहा है

    नए रंग की आहटों की।

    पर वह रंग अभी

    समय की कोख में पल रहा है और

    धीरे-धीरे दिमाग़ की शिराओं में

    जम रहा है।

    उसे तसकीन है कि

    वह रंग हर आदमी के

    लहू में

    बदलाव की आंधी बनकर

    एक दिन दौड़ेगा।

    लेकिन

    कैनवस पर

    इन दिनों

    जगह-जगह चिकटे धब्बे

    इस बात के सबूत हैं कि

    यह रंग उस कलाकार के साथ नहीं है

    जो हिंदुस्तान की तसवीर

    उकेरने की तदबीरें करता रहा है।

    स्रोत :
    • रचनाकार : सुशील कुमार
    • प्रकाशन : हिन्दवी के लिए लेखक द्वारा चयनित

    Additional information available

    Click on the INTERESTING button to view additional information associated with this sher.

    OKAY

    About this sher

    Close

    rare Unpublished content

    This ghazal contains ashaar not published in the public domain. These are marked by a red line on the left.

    OKAY