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नइहरे कै सुधि बिसराई कइसे

naihre kai sudhi bisrai kaise

परवाना प्रतापगढ़ी

परवाना प्रतापगढ़ी

नइहरे कै सुधि बिसराई कइसे

परवाना प्रतापगढ़ी

और अधिकपरवाना प्रतापगढ़ी

    छाई दुःख कै बदरिया हटाई कइसे,

    माई नइहरे कै सुधि बिसराई कइसे,

    भूलै नाही सख्यिा सहेलियन कै बतिया,

    ससुरे हाल खुलै कट जाय रतिया,

    प्यास अँखिया कै अपने बुझाई कइसे।

    माई नइहरे कै सुधि...

    सास बोलै बोलिया ननद बैरनिया,

    सोझे मुँहे हमसे बोलै देवरनिया,

    देवरा हलिया बताई कइसे।

    माई नइहरे कै सुधि...

    हमरी जेठनिया का बाटै हो गुमनवा,

    रोजै गिनवावै ला दहेज कै समनवा,

    भीगल अँसुआ से अँचरा झुराई कइसे।

    माई नइहरे कै सुधि...

    तोहरे बखरिया कै रहे पुरखिनिया,

    छोड़तै डेहेरिया मै बनी मँगतिनिया,

    अब पेटवा कै रोटिया जुहाई कइसे।

    माई नइहरे कै सुधि...

    इहै मन कहै अब खाई हो जहरवा,

    दूर होइ जाय सब दिन कै दुखड़वा,

    परवनवा कै जियरा जुड़ाई कइसे

    माई नइहरे कै सुधि...

    स्रोत :
    • पुस्तक : रस गागरी (पृष्ठ 9)
    • रचनाकार : परवाना प्रतापगढ़ी
    • प्रकाशन : अभिव्यक्ति संगम, साहित्यिक संस्था, लालगंज प्रतापगढ़
    • संस्करण : 2013

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