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नहि जानि धरोहरि कत' हेरायल?

nahi jani dharohari kat herayal?

अशोक कुमार दत्त

अशोक कुमार दत्त

नहि जानि धरोहरि कत' हेरायल?

अशोक कुमार दत्त

और अधिकअशोक कुमार दत्त

    चीनियाँ दीया, चीनियाँ गणेश

    चीनियाँ झालरि, चहुँ दिसि चतरल

    चीनियाँ चाउमिन, चीनियाँ मोमो

    चीनियाँ जाल सगरो पसरल

    माटिक लक्ष्मी, माटिक डिबिया

    तुलसी-चौराक दीप कत' भुलायल?

    नहि जानि धरोहरि कत' हेरायल

    पहिरि 'बड़बुडा', कुंडलधारी

    जुट्टी बन्हने, पहुना पैसल

    सुटुक्का 'जींस', ड्रेगन टी-सर्ट

    'गोगल्स' लटकौने कनियाँ धमकलि

    लहठी-साड़ी, डोपटा-धोती

    अहिबातक सेनुर कत' बिलायल? नहि जानि...

    नहि वंश-गोत्र, नहि ठाँओ-पाँजि

    अपने मोने बियाह रचौलक

    'अपन-महिस कुड़हरिए नाथब'

    'लिभइन रिलेशन' पाठ पढ़ौलक

    कौनी-मौनी, पुरहर-पाती

    अहिबक फर, कत' ओंघरायल? नहि जानि...

    भाषण आँगल, भोजन आँगल

    पहिरब आँगल, रहब आँगल

    मंडनक सुग्गा मौन बैसल

    सौराठ सभा थाकल-हारल

    एहि घिचि-घाच, एहि राजनीतिमे

    'कैथी-तिरहुता' कत' लुटायलि, नहि जानि...

    बेटा उड़ि गेल, विदेश बैसल

    बेटी उड़ंत भऽ खोप तानल

    मातु-पिता टग हनथि खाट पर

    छोड़ि 'सरबन' लंक पड़ायल

    एहि भागम-भाग, एहि उहा-पोह मे

    मनुक्खक ममता कत' मेटायल।

    नहि जानि धरोहरि कत' हेरायल?

    स्रोत :
    • पुस्तक : झिझिरकोना (मैथिली कविता-संग्रह) (पृष्ठ 11)
    • रचनाकार : अशोक कुमार दत्त
    • प्रकाशन : शेखर प्रकाशन, पटना
    • संस्करण : 2017

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