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जूड़िशीतल

juDishital

आनन्द मोहन झा

आनन्द मोहन झा

जूड़िशीतल

आनन्द मोहन झा

और अधिकआनन्द मोहन झा

    ताकि रहल छथि सलाइ

    जरा देबय चाहैत छथि ओहेन सभ किछु

    जाहिसँ जरि रहल छैक

    समाज, देश, सगर संसार

    हमहुँ ताकि रहलहुँ अछि

    कोनो शीतल जलक स्रोत

    जाहिसँ मिझा सकी आगि

    जे जरा रहल अछि

    एहि समाज, एहि देश, एहि संसारकेँ

    हम चाहैत छी मिझाबी आगि

    संगहि

    शीतल सेहो होइक लोकक

    मोन, मति, स्वभाव सभटा

    मिथिलाक संस्कृतिमे फगुआ छैक

    सम्मत जरेनाइ छैक

    त' जूड़िशीतल छैक

    जुड़ेनाइ सेहो छैक

    हम आग्रही छी जूड़िशीतलक

    हमरा पसीन अछि जुड़ेनाइ!

    स्रोत :
    • पुस्तक : नो मेन्स लैण्ड पर ठाढ़ कवि (पृष्ठ 117)
    • रचनाकार : आनन्द मोहन झा
    • प्रकाशन : नवारम्भ, मधुबनी/पटना
    • संस्करण : 2024

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