Font by Mehr Nastaliq Web

अपने करनीसँ मिटाओल जायब

apne karanisan mitaol jayab

श्याम दरिहरे

श्याम दरिहरे

अपने करनीसँ मिटाओल जायब

श्याम दरिहरे

और अधिकश्याम दरिहरे

    सत्ते छी कहैत

    मनुखोकेँ एकदिन

    मशीने बनौतइ।

    सिलिकॉन चिप्समे

    बदलि जेतैक माथ

    बटन टा दबायब जनतै हाथ

    भावना संवेदना

    होयत आउटडेटेड

    प्रेम, आनन्द शोक

    पैसि जेतैक रोबोटक आँखिमे

    कामानुभूति इन्टरनेटक पाँखिमे।

    वात्सल्य हैत टेस्ट-ट्यूब बन्न

    क्लोनिंगक पेटमे मातृत्व कानत हकन्न।

    बिआह घर परिवार

    हैत आदिम कुसंस्कार

    गे लेस्वियनसँ

    भरि जायत संसार।

    कम्प्यूटर हैत बादशाह

    मानव जाति गुलाम

    तखन कथीक देश

    कथीक गाम

    एकेबेर बाजि जायत

    सबहक राधेश्याम।

    मनुखक जेनोम ग्राफ पढ़ि

    मशीने बनाओत मनुखक नवका जेनरेशन

    महामानव!

    अतिमानव!!

    प्रतिमानव!!!

    प्रकृति बनौलक बानरसँ मनुख

    तैओ बानर रहि गेल बाँचल

    मुदा बान्हि लिअऽ गीरह

    अतिमानव प्रतिमानवक दुनियामे

    मेटा जायत

    मानवक अजुका संस्करण

    संरक्षित रहत मात्र डीएनए।

    डायनासोर जकाँ सड़कक कात

    पुतला बनाकऽ

    हमहुँ सब सजा देल जायब

    बच्चाक क्लासमे इतिहास जकाँ पढ़ाओल जायब

    सत्ते कहइ छी

    एकदिन हमसब आदमी

    अपने करनीसँ मिटाओल जायब।

    स्रोत :
    • पुस्तक : क्षमा करब हे महाकवि [मैथिली कविता-संग्रह] (पृष्ठ 82)
    • रचनाकार : श्याम दरिहरे
    • प्रकाशन : नवारंभ, पटना/मधुबनी
    • संस्करण : 2016

    Additional information available

    Click on the INTERESTING button to view additional information associated with this sher.

    OKAY

    About this sher

    Close

    rare Unpublished content

    This ghazal contains ashaar not published in the public domain. These are marked by a red line on the left.

    OKAY